About sun in Hindi - सूर्य के बारे में रोचक जानकारियां

About sun in Hindi - सूर्य के बारे में रोचक जानकारियां

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About sun in hindi

About  sun in hindi

About sun in hindi - हमारे सौरमंडल का अकेला सबसे बड़ा और चमकदार तारा है ।सूरज के बिना धरती पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। 

  धरती और सारे ग्रह सूर्य के चारो और परिक्रमा करते  है । जीवन की मौजूदगी सूर्य से मिलने वाली रोशनी के कारण ही है ।
  सूर्य की रोशनी को धरती पर पहुंचने में 8 मिनट 22 सेकंड का समय लगता है । About sun in Hindi 

 सूरज मिलने वाली रोशनी के कारण ही धरती पर पेड़-पोधे पनपते है।
 सूर्य से एक घण्टे में मिलने वाले ऊर्जा पूरे धरती पर एक साल में खपत की गई ऊर्जा के बराबर होती है। 
  धरती की तुलना में सूरज 3,30,000 गुना भारी है।सूर्य का द्रव्यमान 1.989×10^30 किलोग्राम है ।

 सूरज का व्यास 1.3927 मिलियन किलोमीटर है ।

 यदि हम सूरज को खोखला गोला माने तो 10,00000 Earth इसको भरने में लगेगी ।
 सूरज पर gravitiy धरती की तुलना में 28 गुना ज्यादा है । 

अर्थात यदि धरती पर किसी वस्तु का वजन 10 किलो है तो सूर्य पर उसका वजन 280 किलो होगा ।

 सूरज पर gravity 274  मीटर /सेकंड^2 है। About sun in hindi

सूरज कैसे बना (about sun in hindi)-

सूरज का निर्माण लगभग 450 करोड़ साल पहले हुआ था ।

इसका निर्माण धूल और हाइड्रोजन गैस के बादलों में हुआ था । इन गैस और धूल के बादलों को Nebula  भी कहा जाता है।

इन गैस के बादलों में धूल कणों तथा हाइड्रोजन गैस इकठ्ठा होकर आकार लेने लगी।
जैसे जैसे ये संघनित होने लगे इनमें दाब और तापमान बढ़ने लगा।
जब तापमान एक करोड़ सैल्सियस हो गया तो हाइड्रोजन गैस के अणु जुड़कर हीलियम बनाने लगे।

और नाभिकीय संलयन की अभिक्रिया सुरु हो गई।
इस तरह हमारे सूरज का निर्माण हुआ ।


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सूरज से हमें प्रकाश क्यों मिलता है ?

सूरज दो पदार्थों से मिलकर बना है । हाइड्रोजन तथा हीलियम

इसमें 73 फीसदी हाइड्रोजन है तथा 27 फीसदी हीलियम
सूर्य से हमें प्रकाश इसमें होने वाली नाभिकीय संलयन की अभिक्रिया के कारण मिलता है।

इस अभिक्रिया में हाइड्रोजन अणु जुड़कर हिलियम का अणु बनाते हैं , जिससे ऊर्जा मुक्त होती है ।

और यह ऊर्जा हमें सूर्य से प्रकाश के रूप में प्राप्त होती है । About sun in Hindi

सूर्य की आंतरिक संरचना (about sun in hindi)-

सूरज के सबसे आंतरिक हिस्से को core कहा जाता है। Core का तापमान 1.5 करोड़ डिग्री सैल्सियस होता है ।

इस हिस्से में दबाव 1.5 लाख किलमीटर/वर्ग मीटर होता है। About sun in Hindi
Core के बाहर  वाले हिस्से को विकिरण क्षेत्र ( radiative zone)  कहते है।

यहां पर फोटोन मौजूद होते है जो अभिक्रिया में बनी ऊर्जा के स्थानांतरण का कार्य करते है।

सूर्य की core में बनी ऊर्जा को सूरज की बाहरी सतह पर पहुंचने में कई करोड़ों साल लग जाते हैं।

सूर्य की core तथा  radiative zone मिलकर सूरज का 85 % भाग बनाते है।

इसके पश्चात होता है सवहन क्षेत्र (convective zone)
यह सूरज का 15 फीसदी हिस्सा होता है।

इस हिस्से में गैसों का चक्रीकरण चलता रहता है।
कोर से उच्च ताप की गैस बाहर की ओर आती रहती है , तथा इस क्षेत्र से कम ताप की गैस अंदर की तरफ जाती है।

इस हिस्से के बाद आता है photosphere (सूरज का प्रभामंडल )
यह को हिस्सा होता है जो हमें दिखाई देता हैं।यह परत 100 किलोमीटर मोटी होती होती हैं।
इसके ऊपर होता है cromosphere
यह भाग सूरज की सतह से अधिक गर्म होता है ।इस भाग का तापमान 50,000°सैल्सियस तक होता है।

इस हिस्से के बाद का हिस्से को कोरोना कहा जाता है।यह इलेक्ट्रिक गैसों का क्षेत्र होता हैं ।

इसका तापमान दस लाख सैल्सियस से भी अधिक होता है।

सूरज पर भी होते हैं काले धब्बे -

आपने चांद की सतह पर तो दाग देखे होंगे लेकिन क्या  कभी सुना है कि सूरज की सतह पर भी काले धब्बे होते है ।

इनका रंग काला क्योंकि इनका तापमान सूरज के अन्य हिस्सों के ताप की तुलना में 2000°सैल्सियस तक कम होता है ।

इनको sunspots कहा जाता हैं ।

Sunspots-

Sunspots  को दो भागों में बांटा जाता हैं -
एक हिस्से को Penumbra तथा एक हिस्से को Umbra
Penumbra  कम काला होता है ,तथा umbra अधिक काला होता है।
ये sunspots दो के जोड़े में पाए जाते हैं।
इनकी निश्चित संख्या  नहीं होती है , इनकी संख्या कम ज्यादा होती रहती है।

क्या एक दिन सूरज का भी अंत हो जाएगा -

About sun in Hindi - वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य की शेष अनुमानित उम्र 450 करोड़ साल है।

क्योंकि सूरज से हमें ऊर्जा इसके अंदर होने वाले नाभिकीय संलयन की अभिक्रिया के कारण ही मिलती है ।

इस अभिक्रिया में ईंधन का काम हाइड्रोजन करता है ।
एक दिन ऐसा आएगा जिस दिन सूर्य की कोर में मौजूद सारा हाइड्रोजन , हीलियम में बदल जाएगा

तब नाभिकीय संलयन की अभिक्रिया रुक जाएगी ।
लेकिन ऐसा होने से पहले ही धरती पर जीवन समाप्त हो चुका होगा ।

क्योंकि सूर्य का तापमान इतना अधिक बढ़ जाएगा कि ग्रह पूरी तरह नष्ट हो जायेगे ।

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