About stars in hindi - तारो की रोचक जानकारियां

About stars in hindi - तारो की रोचक जानकारियां

About stars in hindi - के आसमान में चमकते तारे किसे अच्छे नहीं लगते हैं। बचपन में आपने भी कभी तारो को गिनने की नाकाम कोशिश की होगी।

जब से वैज्ञानिकों ने ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझना शुरू किया है , एक सवाल हमारे दिमाग में जरूर आता है , कि आखिर ब्रह्माण्ड कितना बड़ा है ?

यदि हम तारो कि बात करे तो हमारी आकाशगंगा milky way galaxy में ही 200 अरब से भी ज्यादा तारे हैं।

इसके आलावा हमारी पड़ोसी आकाशगंगा andromeda galaxy में 200 खरब तारे है। तो आप सोच सकते है , कि हमारा ब्रह्माण्ड कितना बड़ा है।

इस आर्टिकल में हम तारो से जुड़ी कुछ रोचक बातें जानेंगे। About stars in hindi

About stars in hindi

तारे कैसे बनते है ?

अगर आप विज्ञान में रुचि रखते है , तो तारो को देखकर आपने भी ख्याल में एक बात आयी होगी , कि इतनी बड़ी मात्रा में तारो का निर्माण कैसे हुआ होगा ?

चलिए तो अब जानते है , कि तारो का निर्माण कैसे होता है ? हमारे ब्रह्माण्ड के किस भाग में बनते है तारे ?About stars in hindi

तारो का निर्माण धूल और गैस के बादलों जिन्हें हम nebula कहा जाता है। एक nebula हाइड्रोजन व हीलियम गैसों से बना बादल होता है।

जब nebula में गुरूत्वाकर्षण बल के कारण ये धूल तथा गैस के कण संघनित होना शुरू हो जाते है।

और जब इनमें गुरूत्वाकर्षण बहुत ज्यादा हो जाता है , तो सारी ऊर्जा के केंद्र में जमा हो जाती हैं।

जब केंद्र का घनत्व बहुत अधिक हो जाता है , तो केंद्र में नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

जिससे नाभिक में सारा हाइड्रोजन , हीलियम में बदलना शुरू हो जाता है। जिससे उस तारे से असीम ऊर्जा बाहर निकलने लगती है।

ऐसी ही एक प्रक्रिया के कारण ही जन्म हुआ था , हमारे सौरमंडल के तारे सूर्य का।

ब्लैकहोल( about stars in hindi)

जैसा कि आप जानते है कि तारो में होने वाली नाभिकीय संलयन की अभिक्रिया में उसमे हाइड्रोजन , हीलियम में परिवर्तित होता रहता है।

लेकिन एक समय के बाद जब सारा हाइड्रोजन , हीलियम में परिवर्तित हो चुका होता है , तो तारे के केंद्र तथा सतह पर लगने वाले बल संतुलन में नहीं रह पाते है।

इससे तारे की कोर सिकुड़ने लगती है । इससे तारे का सारा द्रव्यमान एक छोटे से बिंदु में समाहित हो जाता है।

इससे एक ब्लैक होल बन जाता है। जिसका घनत्व इतना ज्यादा होता है , कि प्रकाश की किरण भी उससे पार नहीं जा सकती है।

लेकिन ये प्रक्रिया बहुत बड़े आकार के तारो के साथ में ही होती है।

हमारी आकाशगंगा milky way galaxy के केंद्र में भी एक ब्लैकहोल मौजूद है। इसका नाम seggatirius A है।

Nutron star

एक nutron star के बनने की प्रक्रिया भी blackhole जैसी ही होती है। लेकिन ये छोटे आकार के तारो के साथ होता हैं।

लेकिन एक तारे के केंद्र में जब इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन मिलकर न्यूट्रॉन बनाने लगते है , तो तारे के कोर का घनत्व बहुत ज्यादा हो जाता है।

इससे तारे का बाहरी हिस्सा एक विस्फोट के साथ नष्ट हो जाता है । जिसमें से बहुत अधिक ऊर्जा अंतरिक्ष में फेल जाती है।

इससे एक न्यूट्रॉन तारा बन जाता है। इन तारो का व्यास 15 से 20 किलोमीटर तक का होता है।

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तारे क्यों टिमटिमाते हैं ?(about stars in hindi)

आप जब भी तारो को देखते है , तो वो आपको टिमटिमाते हुए दिखाए देते है। लेकिन क्या असल में ऐसा होता है ?

दरअसल तारे टिमटिमाते नहीं बल्कि वे हमें धरती के वायुमंडल के कारण हमें टिमटिमाते हुए दिखाई देते हैं।

जब तारो से आने वाला प्रकाश धरती के वातावरण में प्रवेश करता है , तो उसे वायुमंडल की विभिन्न परतो से होकर गुजरना पड़ता है।

इन सभी परतों का घनत्व अलग अलग होने के कारण तारे टिमटिमाते हुए दिखाए देते है।

तो इस आर्टिकल में आपने तारो के बारे (about stars in hindi ) जाना ।

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